Saturday, 11 July 2020

Veiled face, veiled words!

Brandished a villain, I'm the real hero here,
I did the dirty work, from which you crawl and fear.
Confused? let's clear the air,
Lend me your ear, hear! hear!

Shoot that guy's head,
Knee on his neck,
Medals on my chest.
Feathers on my crest.

BLM, SJW, vandals and terrorists,
Get me the grenades, the rifles, the baton sticks,
Burn them down, the justice-seeking clown.
I've decided to take it up, to clean my home, my streets my town.

Let them fight, let them cry.
On their candles, my dinner shall fry.
And if they want, their homes can be my fuel,
Think about it, they will make a terribly fine tool.

Time to don my uniform,
Freestyle as a cop, a boss, a suit a crown.
Play me cards right, put em down.
Bid some money, some land, some lives.

And when it is all done,
to the next celebrity botox, they have all gone,
I'll step up my game, set up my camp.
Grease them all up, serve the sacrificial lamb.

It's now time to wait for the streets to dry,
for something to silence their cry,
sit back down, sip on my scotch.
and to munch on these damned chicken fry.

Sunday, 29 March 2020

लौट आना



कहता हूँ खुदसे ही तेरी याद मैं, कभी वक़्त  मिले, तो लौट आना।  
ज़्यादा नहीं मांगूंगा,
बस अपनी बची हुई ज़िन्दगी की अटेची , और फिर कुछ सपनो के झोले,
इन सबको लेते आना।  
वक़्त मिले, तो बेझिजक, बिन सोचे, बस लौट आना।  

मेरी बाहें उस दिवार की तरह नहीं हैं, 
जिसने बंद कर रखा हैं तुझे, मुझसे अलg, मुझसे दूर।  
यह तो तुम्हारे लिए हमेशा ही खुली हैं। 
हाँ! शायद यह हो जाए इस दरमियान, की मैं जो हौं पूरी तरह चूर।  
पर उस हादसे को खुधको रोकने न देना, वक़्त अगर मिले, तो बस लौट आना।  

हैं दफ़न बहुत जगह, मेरी बातों क वो लैश,
कभी सोचता हूँ, बता दूँ, दिखा दूँ वो सारी कब्रें तुझे।  
पर डर जाता हूँ, क्या और दूर करदेगी तू , यह सब देख कर मुझे?
अगर लगे, की इससे तू न घबराएगी, न होगी खफा, 
तो रुकना मत, बस सीधा लौट आना।  

अगर तुझे फिर कभी मुझपे भरोसा, मुझसे प्यार हो,
तो आवाज़ लगाते, एक दफा मेरा नंबर मिलाके,
फिर उसी मासूमियत से एक बार मेरा नाम पुकार लेना,
देख लो, अगर मन माने,  तो लौट आना।  

जिस तरह तू अब भी, मेरी बातों मैं, यादों मैं,
ख़्वाबों मैं, जज़्बातों मैं एकदम अचानक ही आ जाती हैं,
देख किसी रोज़, मन करे 
तो उसी  तरह मेरी बाहों मैं चली एना, 
देख ना जाना, हो सके तो फिर लौट आना।  

न गिला का मौका दूंगा, शिक्वाह की न कोई वजह,
बस लौटादे तू जो मुझे, अपने साथी की वो जगह, 
जज़्बात, जूनून, जुबान यह सब तो देख लिए तूने, 
अब बाकी हैं तो बस, अपनी सचाई से तुझे मिलाना, 
यह यारा, सुन न ज़रा, 
अगर थोड़ी सी भी ख्वाहिश जगह, तो लौट आना?

चलो, एक बात और कह देता हूँ, 
हाँ! कुछ शर्तें हैं आने की!
इरादा नहीं हो फिर इस तरह छोड़ जाने का,
बिन बताये, खुद ही रिश्ते को तोड़ दीं का, तभी चली चली आना,
बस, अगर इतना सा हो सके, तो लौट आना।