Sunday, 29 March 2020

लौट आना



कहता हूँ खुदसे ही तेरी याद मैं, कभी वक़्त  मिले, तो लौट आना।  
ज़्यादा नहीं मांगूंगा,
बस अपनी बची हुई ज़िन्दगी की अटेची , और फिर कुछ सपनो के झोले,
इन सबको लेते आना।  
वक़्त मिले, तो बेझिजक, बिन सोचे, बस लौट आना।  

मेरी बाहें उस दिवार की तरह नहीं हैं, 
जिसने बंद कर रखा हैं तुझे, मुझसे अलg, मुझसे दूर।  
यह तो तुम्हारे लिए हमेशा ही खुली हैं। 
हाँ! शायद यह हो जाए इस दरमियान, की मैं जो हौं पूरी तरह चूर।  
पर उस हादसे को खुधको रोकने न देना, वक़्त अगर मिले, तो बस लौट आना।  

हैं दफ़न बहुत जगह, मेरी बातों क वो लैश,
कभी सोचता हूँ, बता दूँ, दिखा दूँ वो सारी कब्रें तुझे।  
पर डर जाता हूँ, क्या और दूर करदेगी तू , यह सब देख कर मुझे?
अगर लगे, की इससे तू न घबराएगी, न होगी खफा, 
तो रुकना मत, बस सीधा लौट आना।  

अगर तुझे फिर कभी मुझपे भरोसा, मुझसे प्यार हो,
तो आवाज़ लगाते, एक दफा मेरा नंबर मिलाके,
फिर उसी मासूमियत से एक बार मेरा नाम पुकार लेना,
देख लो, अगर मन माने,  तो लौट आना।  

जिस तरह तू अब भी, मेरी बातों मैं, यादों मैं,
ख़्वाबों मैं, जज़्बातों मैं एकदम अचानक ही आ जाती हैं,
देख किसी रोज़, मन करे 
तो उसी  तरह मेरी बाहों मैं चली एना, 
देख ना जाना, हो सके तो फिर लौट आना।  

न गिला का मौका दूंगा, शिक्वाह की न कोई वजह,
बस लौटादे तू जो मुझे, अपने साथी की वो जगह, 
जज़्बात, जूनून, जुबान यह सब तो देख लिए तूने, 
अब बाकी हैं तो बस, अपनी सचाई से तुझे मिलाना, 
यह यारा, सुन न ज़रा, 
अगर थोड़ी सी भी ख्वाहिश जगह, तो लौट आना?

चलो, एक बात और कह देता हूँ, 
हाँ! कुछ शर्तें हैं आने की!
इरादा नहीं हो फिर इस तरह छोड़ जाने का,
बिन बताये, खुद ही रिश्ते को तोड़ दीं का, तभी चली चली आना,
बस, अगर इतना सा हो सके, तो लौट आना।  

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